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MEMBER SECRETARY

Prof. Kumar Ratnam

 

           

 

         

 

 

 

सदस्य सचिव की कलम से ...

        हर्ष का विषय है कि यह वर्ष भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद् के लिए एक एतिहासिक महत्त्व का वर्ष है I क्योंकि इस वर्ष दो महत्वपूर्ण कार्य का शुभारम्भ हो रहा है I पहला देश की आजादी के 75 वर्ष पूर्ण होने पर आजादी का अमृत महोत्सव’ की शुरूआत तथा दूसरा भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली की स्थापना के 50वें वर्ष का श्री गणेश। यह दोनों ही कार्यक्रम परिषद् के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। जहाँ 50वाँ वर्ष परिषद् के कार्यों तथा भविष्य की योजनाओं को आकलित करने का वर्ष है, वहीं आजादी का अमृत महोत्सव पूरे देश के लिए एक ऐतिहासिक व गौरवशाली अतीत को याद करने एवं संजोने का पल है। हम सभी का सौभाग्य है कि हम उक्त दोनों कालखंडों के साक्षी बन रहे हैं। आजादी के 75 साल पर परिषद् द्वारा स्वतंत्रता आंदोलन में गुमनाम रहे क्रांतिकारियों, स्थानों, संस्थानों, प्रतिबंधित साहित्य और अन्य विषयों को केन्द्र में रखकर संगोष्ठी, व्याख्यान, परिसंवाद का आयोजन वर्ष भर प्रमुखता के साथ करने तथा इन सभी को संकलित कर महत्वपूर्ण प्रकाशन करने की भी योजना है। मुझे यह बताते हुए हर्ष की अनुभूति हो रही है कि परिषद् आजादी के अमृत महोत्सव पर अपनी दोनों महत्वपूर्ण शोध पत्रिकाओं इंडियन हिस्टोरिकल रिव्यु और इतिहास (शोध पत्रिका) का विशेषांक भी प्रकाशित कर रहा है। इनमें 1757 — 1947 तक के भारत का अंग्रेजी सत्ता के विरुद्ध संघर्ष के विविध आयामों पर शोध आलेख प्रकाशित किए जाएंगे। इसी प्रकार परिषद् की स्थापना के 50 वर्ष पर भी कार्यक्रमों, व्याख्यानों, संगोष्ठियों के साथ कई प्रकाशन भी करने की योजना है। यह दोनों ही उत्सव जहां एक तरफ परिषद् के लिए महत्वपूर्ण हैं, वहीं आम-जन व शोधार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक सिद्ध होंगे। हमारी कामना होगी कि हम इस उत्सव को भारतीय संस्कृति की धुरी सर्वे भवन्तु सुखिनः व वसुधैव कुटुम्बकम की महत्ता के साथ मनाते हुए अपने लक्ष्यों को प्राप्त करें।
 
                                  
 
                                    शुभकामनाओं सहित
 
प्रो. कुमार रतनम्, डी.लिट.
(सदस्य सचिव)
भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली